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देहरादून (ब्रेकिंग न्यूज़) धामी कैबिनेट विस्तार: क्षेत्रीय और जातीय संतुलन साधने की कोशिश, गढ़वाल-कुमाऊं के बीच बराबरी का संदेश


देहरादून। पुष्कर सिंह धामी सरकार ने लंबे इंतजार के बाद मंत्रिमंडल का विस्तार कर राजनीतिक समीकरणों को साधने की बड़ी कवायद की है। देहरादून स्थित लोक भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में पांच विधायकों—मदन कौशिक, खजान दास, प्रदीप बत्रा, भरत चौधरी और राम सिंह कैड़ा—ने मंत्री पद की शपथ ली।


इस विस्तार के साथ ही धामी सरकार ने खाली पड़े सभी मंत्री पद भरते हुए राजनीतिक, क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधने का स्पष्ट संकेत दिया है।


गढ़वाल बनाम कुमाऊं: संतुलन की रणनीति
उत्तराखंड की राजनीति में गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्र का संतुलन बेहद अहम माना जाता है। पहले से कैबिनेट में सतपाल महाराज, धन सिंह रावत और सुबोध उनियाल गढ़वाल क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, जबकि रेखा आर्य और सौरभ बहुगुणा कुमाऊं से थे।

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अब नए मंत्रियों में:
हरिद्वार (गढ़वाल) से मदन कौशिक और प्रदीप बत्रा
देहरादून (गढ़वाल) से खजान दास
रुद्रप्रयाग (गढ़वाल) से भरत चौधरी
नैनीताल (कुमाऊं) से राम सिंह कैड़ा
इस तरह गढ़वाल का दबदबा बरकरार रखते हुए कुमाऊं को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है, हालांकि संख्या के लिहाज से गढ़वाल क्षेत्र अभी भी भारी दिख रहा है।


जातीय समीकरण: दलित, ब्राह्मण और अन्य वर्गों का संतुलन
कैबिनेट विस्तार में जातीय समीकरण भी अहम रहे:
खजान दास को दलित चेहरे के रूप में शामिल कर सामाजिक संतुलन साधा गया। मदन कौशिक और प्रदीप बत्रा के जरिए व्यापारी व शहरी वर्ग को प्रतिनिधित्व
भरत चौधरी और राम सिंह कैड़ा के जरिए क्षेत्रीय प्रभाव वाले नेताओं को जगह यह संकेत देता है कि भाजपा ने आगामी चुनावी रणनीति को ध्यान में रखते हुए सभी प्रमुख वर्गों को साधने की कोशिश की है।

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दल-बदल का फैक्टर भी अहम
नई कैबिनेट में शामिल दो चेहरे—प्रदीप बत्रा और राम सिंह कैड़ा—कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए हैं। वहीं पहले से कैबिनेट में मौजूद सतपाल महाराज, सुबोध उनियाल और रेखा आर्य भी कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए थे।
यह दर्शाता है कि भाजपा दल-बदल कर आए नेताओं को भी राजनीतिक रूप से साधकर उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने से पीछे नहीं हट रही है।


अनुभव और संगठन का मिश्रण
मदन कौशिक: संगठन और सरकार दोनों में लंबा अनुभव, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और कई बार मंत्री

खजान दास: दलित चेहरा और संगठन में मजबूत पकड़

प्रदीप बत्रा: लगातार जीतने वाले विधायक, हरिद्वार क्षेत्र में मजबूत पकड़

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भरत चौधरी: सीनियर नेता और क्षेत्रीय प्रभाव

राम सिंह कैड़ा: जमीनी नेता, निर्दलीय जीत का अनुभव


राजनीतिक संदेश क्या है?
धामी सरकार के इस विस्तार से तीन बड़े संदेश निकलते हैं:
चुनावी तैयारी: 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर टीम तैयार
संतुलन की राजनीति: क्षेत्रीय और जातीय समीकरण साधने की कोशिश
वफादारी का इनाम: दल-बदल कर आए नेताओं को भी अहम भूमिका


आगे की चुनौती
अब सबसे बड़ी चुनौती इन नए मंत्रियों के प्रदर्शन की होगी। पहाड़ी राज्य में विकास, रोजगार, पलायन और बुनियादी सुविधाएं जैसे मुद्दे अभी भी अहम हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह नया संतुलित मंत्रिमंडल जमीनी स्तर पर कितना असर दिखा पाता है।

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