उत्तराखंड
लालकुआं/हल्दूचौड़:- सोयाबीन फैक्ट्री में उपखनिज प्रकरण पर डीएम सख्त, जिला खनन अधिकारी करेंगे जांच……
सोयाबीन फैक्ट्री में उपखनिज प्रकरण पर डीएम सख्त, जिला खनन अधिकारी करेंगे जांच
(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});
गोदामों के नीचे से निकले उपखनिज को ठिकाने लगाने की सूचना से मचा हड़कंप, गड्ढे भरने और विद्युत पोल गायब होने के वीडियो भी सामने आने का दावा
हल्दूचौड़। नैनीताल जिले के हल्दूचौड़ स्थित सोयाबीन एवं वनस्पति इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स में कथित रूप से उपखनिज के अवैध उत्खनन और उसे ठिकाने लगाए जाने के मामले ने अब गंभीर रूप ले लिया है। प्रकरण को लेकर नैनीताल के जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने जिला खनन अधिकारी से पूरे मामले की जांच कराने की बात कही है।
बताया जा रहा है कि सोयाबीन फैक्ट्री परिसर में पूर्व में कई पुराने गोदामों को तोड़ा गया था। इसके बाद गोदामों के नीचे से बड़ी मात्रा में उपखनिज निकलने और उसे परिसर से बाहर अथवा अन्य स्थानों पर ठिकाने लगाए जाने की सूचनाएं सामने आईं। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठने के बाद प्रशासन का ध्यान इस ओर गया।
इसी क्रम में कुछ दिन पूर्व उपजिलाधिकारी रेखा कोहली द्वारा फैक्ट्री परिसर का निरीक्षण किए जाने की जानकारी सामने आई थी। निरीक्षण के दौरान आवश्यक कार्रवाई की बात कही गई थी। हालांकि, इसके बाद मामले की जांच फैक्ट्री के अधिकारियों को सौंपे जाने की बात सामने आई, लेकिन अभी तक जांच पूरी होने की जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है।
डीएम ने कहा—जिला खनन अधिकारी करेंगे जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए जब नैनीताल के जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल से इस संबंध में वार्ता की गई तो उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरे प्रकरण की जिला खनन अधिकारी के माध्यम से जांच कराई जाएगी।
डीएम के इस निर्देश के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि फैक्ट्री परिसर में वास्तव में कितना उपखनिज मौजूद था, उसके उत्खनन अथवा हटाए जाने की स्थिति क्या थी, उसे कहां ले जाया गया और इसके लिए किसी विभागीय अनुमति अथवा वैधानिक प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं।
जांच के बीच गड्ढे भरने से उठे सवाल
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि परिसर में उपखनिज निकाले जाने की शिकायत सामने आई थी और निरीक्षण के बाद जांच की प्रक्रिया चल रही थी, तो जांच पूरी होने से पहले संबंधित स्थानों पर बने गड्ढों का भर जाना क्या संकेत देता है?
स्थानीय स्तर पर यह भी कहा जा रहा है कि इस संबंध में कुछ वीडियो सामने आए हैं, जिनमें परिसर से विद्युत पोल गायब होने से जुड़ी स्थिति दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, इन वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि और यह निर्धारित किया जाना बाकी है कि पोल कब, कैसे और किन परिस्थितियों में हटाए गए।
पुलिस में एफआईआर नहीं, कार्रवाई को लेकर भी सवाल
मामले की सूचना संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाए जाने के बावजूद अभी तक पुलिस में कोई प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में सवाल यह भी है कि यदि जांच के दौरान किसी तरह की अनियमितता, अवैध उत्खनन, सरकारी संपत्ति को नुकसान अथवा अन्य आपराधिक कृत्य सामने आता है तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी और कार्रवाई किस स्तर पर की जाएगी।
फिलहाल जिलाधिकारी द्वारा जिला खनन अधिकारी से जांच कराने की बात कहे जाने के बाद मामले में प्रशासनिक जांच की उम्मीद जगी है। अब जांच रिपोर्ट ही यह स्पष्ट करेगी कि फैक्ट्री परिसर में उपखनिज के संबंध में वास्तव में क्या हुआ और इसमें किसी व्यक्ति अथवा संस्था की जिम्मेदारी बनती है या नहीं।
पूरे मामले में सोयाबीन एवं वनस्पति इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स के प्रबंधन का पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण है। प्रबंधन की ओर से यदि कोई स्पष्टीकरण अथवा दस्तावेज उपलब्ध कराया जाता है तो उसे भी खबर में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।

