उत्तराखंड
हल्द्वानी:- गौशाला प्रबंधन ने लगाए बदनाम करने के आरोप, कहा- अधूरी वीडियो से फैलाया गया भ्रम
गौशाला प्रबंधन ने लगाए बदनाम करने के आरोप, कहा- अधूरी वीडियो से फैलाया गया भ्रम
हल्द्वानी। निकटवर्ती राजपुरा स्थित नगर निगम गौशाला का संचालन कर रही आश्रय समिति की संचालिका निकिता सुयाल ने बुधवार को प्रेस वार्ता कर गौशाला और संस्था को कथित तौर पर बदनाम किए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हाल ही में सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में पूरे घटनाक्रम को नहीं दिखाया गया, बल्कि अधूरी जानकारी के आधार पर भ्रम फैलाया गया।
निकिता सुयाल ने बताया कि कुछ दिन पूर्व गौशाला में कुछ गोवंश आपस में लड़ गए थे, जिससे कुछ गायें घायल हो गई थीं। उनके अनुसार प्रारंभिक जानकारी के अनुसार गौशाला की बाउंड्री के बाहर से किसी अज्ञात व्यक्ति ने गायों को रोटी आदि खिलाने का प्रयास किया, जिसके चलते अचानक गोवंश में भगदड़ मच गई। इसी दौरान आपसी धक्का-मुक्की में कुछ गायें घायल हो गईं। उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम का केवल एक हिस्सा वीडियो के रूप में प्रसारित किया गया, जिससे वास्तविक स्थिति लोगों तक नहीं पहुंच सकी।
उन्होंने आरोप लगाया कि वीडियो वायरल होने के बाद कुछ लोग स्वयं को गोरक्षक और गोसेवक बताकर गौशाला पहुंचे तथा बिना तथ्यों की जानकारी लिए हंगामा किया। उनका कहना था कि ऐसे अधिकांश लोगों को उन्होंने पहली बार गौशाला में देखा और इनमें से किसी ने पहले कभी यहां आकर गोसेवा नहीं की।
निकिता सुयाल ने कहा कि उनकी समिति राजपुरा गौशाला के साथ-साथ रामपुर रोड स्थित गौशाला का भी नियमित एवं विधिवत संचालन कर रही है। उन्होंने प्रेस वार्ता के दौरान पूर्व में विभिन्न कारणों से घायल कुछ गोवंश को भी मीडिया के सामने प्रस्तुत किया और दावा किया कि उनका उपचार लगातार कराया जा रहा है तथा अधिकांश पशु पहले की अपेक्षा काफी हद तक स्वस्थ हो चुके हैं।
इसी दौरान नगर निगम हल्द्वानी की टीम भी गौशाला पहुंची और व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। नगर निगम ने जेसीबी मशीन के माध्यम से परिसर में सफाई अभियान चलाकर कीचड़ हटाने का कार्य कराया।
निकिता सुयाल ने कहा कि बरसात के मौसम में गौशाला परिसर में कीचड़ होना स्वाभाविक है। उन्होंने बताया कि जब तक परिसर में ईंटों के पक्के खड़ंजे का निर्माण नहीं हो जाता, तब तक वर्षा ऋतु में कीचड़ और दलदल जैसी समस्या बनी रह सकती है। उन्होंने प्रशासन से गौशाला में स्थायी आधारभूत सुविधाओं के विकास की भी अपेक्षा जताई।