उत्तराखंड
हल्द्वानी: ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी में 10 दिवसीय ड्रोन कैप्सूल सत्र का भव्य समापन
हल्द्वानी, 18 मार्च 2026
ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी हल्द्वानी परिसर में एनसीसी कैडेट्स के लिए आयोजित 10 दिवसीय ‘ड्रोन कैप्सूल प्रशिक्षण सत्र’ का बुधवार को भव्य समापन हो गया। समापन समारोह में कैडेट्स द्वारा प्रशिक्षण के दौरान अर्जित तकनीकी कौशल और तैयार किए गए ड्रोन मॉडल्स का आकर्षक प्रदर्शन किया गया।
इस उच्च स्तरीय प्रशिक्षण शिविर में विश्वविद्यालय के साथ-साथ जीआईसी मोतीनगर और एमबीजीपीजी कॉलेज के एयर विंग कैडेट्स के अलावा राष्ट्रीय कैडेट कोर की 78 यूके बटालियन के आर्मी विंग कैडेट्स ने भी उत्साहपूर्वक भागीदारी की।
प्रशिक्षण के दौरान कैडेट्स को ड्रोन तकनीक के आधुनिक पहलुओं से अवगत कराया गया। सिमुलेशन के माध्यम से उड़ान संचालन की बारीकियां सिखाई गईं, वहीं प्रयोगात्मक सत्रों में कैडेट्स ने ड्रोन के विभिन्न पुर्जों को स्वयं असेंबल कर उसकी कार्यप्रणाली को समझा। इसके अतिरिक्त, कैडेट्स ने ड्रोन के भविष्य के उपयोग और नवाचार पर आधारित प्रभावशाली प्रस्तुतियां दीं, जबकि उनके द्वारा तैयार किए गए स्टैटिक मॉडल्स ने सभी का ध्यान आकर्षित किया।
पूरे प्रशिक्षण काल के दौरान कैडेट्स का तकनीकी एवं व्यावहारिक मानकों पर निरंतर मूल्यांकन भी किया गया।
समापन समारोह में कैंपस निदेशक डॉ. एम. सी. लोहानी ने कैडेट्स के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण सत्र छात्रों को भविष्य की उन्नत तकनीकों के लिए तैयार करने में मील का पत्थर साबित होंगे।
वहीं, ग्रुप कैप्टन विवेक रावत (कमांडिंग ऑफिसर, 1 यूके एयर स्क्वाड्रन एनसीसी) ने कहा कि ड्रोन तकनीक आधुनिक युग की अनिवार्य आवश्यकता बन चुकी है और कैडेट्स ने इस क्षेत्र में उत्कृष्ट कौशल का प्रदर्शन किया है।
कर्नल पुनीत लेहल (कमांडिंग ऑफिसर, 78 यूके बटालियन एनसीसी) ने इसे आर्मी और एयर विंग के संयुक्त प्रयास का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि इससे कैडेट्स में टीम वर्क और तकनीकी ज्ञान का विकास हुआ है।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. कामिका चौधरी (सीटीओ, एमबीजीपीजी कॉलेज) ने भी कैडेट्स के नवाचार की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
समारोह में एनसीसी के प्रशिक्षकों और विभिन्न इकाइयों के कैडेट्स की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कैडेट्स को प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए।
यह प्रशिक्षण सत्र कैडेट्स को ड्रोन तकनीक और उसके भविष्य के अनुप्रयोगों के संबंध में व्यापक एवं व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करने में सफल