उत्तराखंड
देहरादून:- उत्तराखंड में मदरसों की पुरानी अनुदान व्यवस्था खत्म, 2027-28 से बजट मद होगी समाप्त: नई शिक्षा व्यवस्था लागू…..
कैबिनेट का बड़ा फैसला: सभी 452 पंजीकृत मदरसों को नई मान्यता व्यवस्था में आना होगा, आधुनिक पाठ्यक्रम लागू करना अनिवार्य
देहरादून, 10 जुलाई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में अल्पसंख्यक शिक्षा व्यवस्था के पुनर्गठन को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। कैबिनेट ने वित्तीय वर्ष 2027-28 से “अरेबिया मदरसों को अनुदान” संबंधी बजट मद को समाप्त करने की मंजूरी दे दी है।
राज्य सरकार के अनुसार, ‘उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम-2025’ तथा नई मान्यता नियमावली-2026 लागू होने के बाद ‘उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ का गठन किया गया है। नई व्यवस्था 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होने के साथ ही पूर्व मदरसा बोर्ड एवं उससे संबंधित पुराने अधिनियम निरस्त हो चुके हैं। ऐसे में पूर्व बोर्ड के अंतर्गत संचालित अनुदान व्यवस्था और उससे जुड़ी बजट मद को भी समाप्त करने का निर्णय लिया गया।
सरकार के मुताबिक, राज्य के सभी 452 पंजीकृत मदरसों को अब नई व्यवस्था के तहत कार्य करना होगा। सरकारी अनुदान एवं अन्य सुविधाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए उन्हें पहले उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर से संबद्धता लेनी होगी और इसके बाद उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता प्राप्त करनी होगी।
नई व्यवस्था के तहत मदरसों में आधुनिक शिक्षा प्रणाली लागू करना अनिवार्य होगा। धार्मिक शिक्षा (दीनी तालीम) पूर्ववत जारी रहेगी, लेकिन इसके साथ विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान सहित शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित अन्य विषय भी पढ़ाए जाएंगे। इससे विद्यार्थियों को राज्य शिक्षा बोर्ड का प्रमाणपत्र प्राप्त होगा, जिससे उन्हें उच्च शिक्षा एवं प्रतियोगी परीक्षाओं में लाभ मिलने की संभावना है।
सरकार का कहना है कि यह निर्णय राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप शिक्षा की गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल शैक्षणिक मानकों को मजबूत करना और छात्र हितों की रक्षा करना है। किसी भी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान के आंतरिक प्रबंधन या उसकी स्वायत्तता में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।
कैबिनेट के इस निर्णय के साथ राज्य में वर्षों से चली आ रही पुरानी मदरसा अनुदान व्यवस्था औपचारिक रूप से समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जबकि भविष्य में अनुदान और अन्य सुविधाएं नई मान्यता एवं नियामक व्यवस्था के तहत ही उपलब्ध कराई जाएंगी।