उत्तराखंड
लालकुआं (नैनीताल) 22 साल की ईमानदार सेवा के बाद नंदन गिरी गोस्वामी हुए सेवानिवृत्त, अध्यक्ष मुकेश बोरा सहित आँचल परिवार ने दी भावभीनी विदाई….
लालकुआं। नैनीताल आँचल दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड में कार्यरत क्षेत्र पर्यवेक्षक नंदन गिरी गोस्वामी के 22 वर्षों के सफल, समर्पित और ईमानदार सेवाकाल पूर्ण होने पर प्रशासनिक भवन परिसर में भव्य एवं भावभीना विदाई समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर संघ के अध्यक्ष मुकेश बोरा सहित अधिकारियों, कर्मचारियों और सहकर्मियों ने उन्हें सम्मानित करते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
समारोह के दौरान अध्यक्ष मुकेश बोरा ने कहा कि वर्ष 2004 से अपनी सेवाएं प्रारंभ करने वाले नंदन गिरी गोस्वामी ने पूरे कार्यकाल में निष्ठा, ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन किया। उन्होंने उपार्जन अनुभाग में रहते हुए दुग्ध समितियों, दुग्ध उत्पादकों और संस्था के बीच मजबूत समन्वय स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई।
उन्होंने आगे कहा कि गोस्वामी का सरल स्वभाव, कार्य के प्रति समर्पण और व्यवहार कुशलता उन्हें हमेशा विशेष बनाती रही। उनकी अनुशासित कार्यशैली और सेवाभाव आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत रहेंगे
इस दौरान अध्यक्ष मुकेश बोरा ने उन्हें शॉल ओढ़ाकर, फूलमाला पहनाकर एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया। उपस्थित वक्ताओं ने भी उनके योगदान को सराहते हुए कहा कि उन्होंने अपनी मेहनत और कर्तव्यनिष्ठा से संस्था को मजबूती प्रदान की, जो सदैव याद रखा जाएगा।
वक्ताओं ने ईश्वर से उनके दीर्घायु, स्वस्थ एवं सुखद जीवन की कामना करते हुए कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद भी उनका अनुभव और मार्गदर्शन संस्था के लिए उपयोगी साबित होगा।
इस अवसर पर नंदन गिरी गोस्वामी ने आँचल परिवार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें यहां हमेशा सहयोग, सम्मान और अपनापन मिला, जिसे वह जीवनभर संजोकर रखेंगे।
कार्यक्रम में सामान्य प्रबंधक अनुराग शर्मा, वित्त प्रभारी उमेश पठालनी, प्रशासन एवं विपणन प्रभारी संजय सिंह भाकुनी, पी एंड आई सुभाष बाबू, एफओ शांति कोरंगा, रश्मि धामी, पूरन चंद्र मिश्रा, राजेंद्र प्रसाद, सुरेश चंद्र, खलील अहमद, विजय चौहान सहित अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे।
नंदन गिरी गोस्वामी ने अपने 22 वर्षों के कार्यकाल में न सिर्फ संस्था को मजबूती दी, बल्कि दुग्ध उत्पादकों और संगठन के बीच विश्वास की मजबूत कड़ी भी स्थापित की—यही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।