उत्तराखंड
नई दिल्ली/नैनीताल: साइबर अपराधों पर सरकार सख्त, सांसद अजय भट्ट के सवाल पर गृह मंत्रालय का जवाब
साइबर अपराधों पर सख्त सरकार, 3 साल का ब्यौरा संसद में मांगा
सांसद अजय भट्ट के सवाल पर गृह मंत्रालय का जवाब, 24.65 लाख शिकायतों में 8690 करोड़ रुपये बचाए गए
नई दिल्ली/नैनीताल।
पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री व नैनीताल-उधम सिंह नगर संसदीय क्षेत्र से सांसद अजय भट्ट ने संसद में अतारांकिक प्रश्न के माध्यम से देश में बढ़ते साइबर अपराधों को लेकर केंद्र सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी। उन्होंने विगत तीन वर्षों में साइबर अपराधों के आंकड़े, राज्यवार वृद्धि प्रतिशत, ऑनलाइन लेनदेन को सुरक्षित बनाने के उपाय तथा आम जनता में साइबर जागरूकता फैलाने के प्रयासों पर सवाल उठाया।
सांसद के प्रश्न के उत्तर में गृह मंत्रालय राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने बताया कि देश में साइबर अपराध से निपटने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000, भारतीय न्याय संहिता, 2023 तथा पोक्सो अधिनियम, 2012 के तहत पर्याप्त कानूनी प्रावधान मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने साइबर अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए तंत्र को मजबूत किया है। इसके तहत गृह मंत्रालय द्वारा भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की स्थापना की गई है, जो देशभर में साइबर अपराधों पर समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करता है।
जनता को शिकायत दर्ज कराने में सुविधा देने के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल शुरू किया गया है, जहां साइबर अपराध से जुड़ी शिकायतें दर्ज की जा सकती हैं। इन शिकायतों पर कार्रवाई संबंधित राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा की जाती है।
वित्तीय धोखाधड़ी को रोकने के लिए वर्ष 2021 में “नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग एवं प्रबंधन प्रणाली” (CFCFRMS) शुरू की गई। मंत्रालय के अनुसार 31 जनवरी 2026 तक 24.65 लाख से अधिक शिकायतों में 8690 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि को बचाया जा चुका है। साथ ही त्वरित सहायता के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1930 भी संचालित किया जा रहा है।
सरकार ने 2 जनवरी 2026 को एक व्यापक एसओपी भी जारी की है, जिससे शिकायतों के निस्तारण में एकरूपता और पीड़ित-केंद्रित व्यवस्था सुनिश्चित हो सके।
जागरूकता अभियान भी तेज
गृह मंत्रालय ने बताया कि साइबर अपराध के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए कई पहल की गई हैं। नरेंद्र मोदी ने “मन की बात” कार्यक्रम में डिजिटल गिरफ्तारी जैसे विषयों पर चर्चा कर लोगों को सतर्क किया। इसके अलावा कॉलर ट्यून अभियान, टीवी-रेडियो कार्यक्रम, सोशल मीडिया, स्कूल अभियान, आईपीएल और कुंभ मेले जैसे बड़े आयोजनों के माध्यम से व्यापक जागरूकता फैलाई जा रही है।
वहीं सरकारी न्यूज चैलन के सहयोग से “साइबर अलर्ट” जैसे कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं, जबकि रेलवे स्टेशन, हवाई अड्डों और सिनेमा हॉल में भी साइबर सुरक्षा से जुड़े संदेश प्रसारित किए जा रहे हैं।
सांसद अजय भट्ट द्वारा उठाए गए सवाल के जवाब में सरकार ने स्पष्ट किया कि साइबर अपराध से निपटने के लिए कानूनी ढांचा, तकनीकी प्रणाली और जन-जागरूकता—तीनों स्तरों पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।