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बिंदुखत्ता राजस्व गांव को CM की घोषणा से हटाने पर कांग्रेस SC विभाग के जिलाध्यक्ष इंदर पाल आर्या का सरकार पर तीखा हमला, बागजाला के मुद्दे पर भी……….

बड़ी खबर:- बिंदुखत्ता राजस्व गांव को CM की घोषणा से हटाने पर कांग्रेस एससी विभाग के जिलाध्यक्ष इंदर पाल आर्या का सरकार पर तीखा हमला

लालकुआं (नैनीताल) कांग्रेस एससी विभाग के नैनीताल जिलाध्यक्ष इंदर पाल आर्या बोले—यह जनता के साथ बड़ा छलावा
नैनीताल जिले के बिंदुखत्ता को राजस्व गांव बनाए जाने की मुख्यमंत्री की घोषणा से हटाए जाने पर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के नैनीताल जिलाध्यक्ष इंदर पाल आर्या ने इस फैसले पर कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे बिंदुखत्ता की जनता के साथ “बड़ा छलावा” करार दिया है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि गौलापार के बागजाला क्षेत्र को लेकर नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने भी विधानसभा सत्र में इसे मालिकाना हक दिए जाने के सम्बंध में जनहित के तहत अपना पक्ष रखा मगर सरकार ने इसे भी अनदेखा कर दिया जिससे बागजाल क्षेत्र के लोग भी खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। इधर इंदर पाल आर्या ने कहा कि भाजपा की डबल इंजन सरकार और चुने हुए जनप्रतिनिधियों ने वर्षों से बिंदुखत्ता की भोली-भाली जनता को राजस्व गांव बनाए जाने का सपना दिखाया। जनता ने इस भरोसे पर संघर्ष किया, आंदोलन किए, उम्मीदें बांधीं, लेकिन अब सरकार अपने ही वादे से पीछे हटती नजर आ रही है। यह न सिर्फ जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है, बल्कि सरकार की कथनी और करनी के अंतर को भी उजागर करता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बिंदुखत्ता जैसे बड़े आबादी वाले क्षेत्र को बार-बार आश्वासन देकर भ्रमित किया गया और जब निर्णय लेने का समय आया तो सरकार ने हाथ खड़े कर दिए। आर्या ने कहा कि बिंदुखत्ता के लोग वर्षों से राजस्व गांव की मांग को लेकर संघर्षरत हैं, लेकिन सरकार की उदासीनता ने जनता को निराश किया है।
कांग्रेस नेता ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने जल्द ही अपने फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया और बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा नहीं दिया, तो कांग्रेस सड़क से सदन तक आंदोलन करेगी। उन्होंने साफ कहा कि आने वाले चुनावों में बिंदुखत्ता की जनता इस सरकार को सबक जरूर सिखाएगी और वादाखिलाफी का जवाब वोट की ताकत से देगी।
इस मुद्दे को लेकर क्षेत्र में आक्रोश का माहौल बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि राजस्व गांव बनने से उन्हें भूमि अधिकार, विकास योजनाओं और सरकारी सुविधाओं का लाभ मिलता, लेकिन एक बार फिर उम्मीदें टूट गई हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार इस बढ़ते जनदबाव के बीच क्या रुख अपनाती है।

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Author (संपादक)

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