उत्तराखंड
हल्द्वानी:- तराई पूर्वी डीएफओ हिमांशु बागरी का यूपी में भी जबरदस्त एक्शन, खैर तस्करी पर कसा शिकंजा……देखें रिपोर्ट:-
बहेड़ी में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, 25 घनमीटर अवैध खैर की लकड़ी बरामद
तराई पूर्वी वन प्रभाग की संयुक्त टीम ने उत्तर प्रदेश में गोदाम पर मारा छापा, संचालक फरार; वन तस्करी नेटवर्क की जांच शुरू
हल्द्वानी, 11 जुलाई। तराई पूर्वी वन प्रभाग की टीम ने उत्तर प्रदेश के बहेड़ी स्थित एक गोदाम पर बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 25 घनमीटर बहुमूल्य खैर का प्रकाष्ठ और लट्ठे बरामद किए हैं। कार्रवाई के दौरान गोदाम संचालक मौके से फरार मिला। वन विभाग ने अज्ञात आरोपितों के खिलाफ भारतीय वन अधिनियम, 1927 की संबंधित धाराओं में वन अपराध दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
प्रभागीय वनाधिकारी हिमांशु बागरी के अनुसार, विभाग को पिछले कई दिनों से गोपनीय सूचनाएं मिल रही थीं कि उत्तराखंड के विभिन्न वन क्षेत्रों से अवैध रूप से खैर के पेड़ों का कटान कर लकड़ी को उत्तर प्रदेश के बहेड़ी स्थित एक गोदाम में एकत्र किया जा रहा है, जहां से उसकी तस्करी की जा रही थी। सूचना की गंभीरता को देखते हुए उनके निर्देशन में विशेष टीम का गठन किया गया। टीम ने कई दिनों तक गोपनीय निगरानी और तकनीकी सत्यापन के बाद शनिवार सुबह करीब छह बजे गोदाम पर योजनाबद्ध छापेमारी की।
छापेमारी के दौरान लगभग 25 घनमीटर खैर का प्रकाष्ठ और लट्ठे बरामद किए गए। मौके पर कोई व्यक्ति नहीं मिला और गोदाम संचालक फरार पाया गया। बरामद लकड़ी को तीन पिकअप और एक ट्रक के माध्यम से गौला रेंज परिसर लाकर सुरक्षित अभिरक्षा में रखा गया है।
वन विभाग ने बताया कि गोदाम संचालक की तलाश की जा रही है तथा अवैध कटान और तस्करी से जुड़े पूरे नेटवर्क की गहन जांच की जा रही है। मामले में संलिप्त सभी व्यक्तियों की पहचान कर उनके खिलाफ नियमानुसार कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
इस संयुक्त अभियान में उप प्रभागीय वनाधिकारी गौला अनिल जोशी, उप प्रभागीय वनाधिकारी सितारगंज सावित्री, वन क्षेत्राधिकारी रनसाली महेंद्र रेकुनी, वन क्षेत्राधिकारी गौला चंदन अधिकारी, वन क्षेत्राधिकारी बाराकोली कैलाश गुणवंत, वन क्षेत्राधिकारी डॉली, नवीन पवार, एसओजी वन क्षेत्राधिकारी नवीन रेकवाल सहित तराई पूर्वी वन प्रभाग के लगभग 50 वन अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल रहे।
प्रभागीय वनाधिकारी हिमांशु बागरी ने कहा कि उत्तराखंड की वन संपदा की सुरक्षा विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। वन अपराध और वन उत्पादों की अवैध तस्करी में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और भविष्य में भी ऐसे विशेष अभियान लगातार जारी रहेंगे।